यह लेख सत्य घटनाओं पर आधारित हैं। इस कहानी में नाम, पात्र और स्थान बदल दिए गए है।
कामराज एक कंपनी में ऑपरेटर का काम करता था। उसके घर में डाइवर्स का केस फॅमिली कोर्ट में चल रहा था। एक दिन वो अपने वकील से बात करता हैं तो पता चलता हैं की अगर वो इसी हालात में अपने बीवी से डाइवर्स लेता हैं तो उसको आधी सैलरी देनी पड़ेगी। वह वकील से पूछता हैं।
"अगर मेरे पास जॉब नहीं रही तो भी आधी सैलरी देनी पड़ेगी।'
"अगर तुम खुदसे जॉब छोड़ देते हैं तो, उसको सेटलमेंट का आधा हिस्सा देना पड़ेगा।" वकील ने कहा।
"क्या वकील सहाब कोई तो रास्ता होगा ना ?" कामराज ने पूछा।
वकील ने कहा दूसरा रास्ता यह हैं की, "अगर तुम्हे कम्पनी से निकाल दे और उसका कोर्ट में केस चल रहा हो, इस हालत में आपको कुछ देना नहीं पड़ेगा।"
हमारी कंपनी एक फार्मास्यूटिकल कंपनी थी। पहले कम्पनी का ऑपरेशन हेल्थ केयर चलाती थी। अब हेल्थ केयर ने वर्ल्ड केयर को अपना यूनिट किरयेपर दे रखा था। यूनिट के साथ साथ जो दस कामगार थे वो भी अब वर्ल्ड केयर के लिए काम करते थे। लेकिन उनकी नियुक्ति तो हेल्थ केयर में ही थी। इसके आलावा और एक तीसरी कम्पनी थी जिसका नाम इंडिया केयर था। अब मामला यह था की हेल्थ केयर बाप के नाम से, वर्ल्ड केयर और इंडिया केयर बेटों के नाम से थी। वर्ल्ड केयर में नाम के लिए मैं और मेरा दोस्त डायरेक्टर थे। एक बात और थी वर्ल्ड केयर और इंडिया केयर का ऑफिस एक ही स्थान पर था। इंडिया केयर का एच आर मैनेजर ही वर्ल्ड केयर को भी हैंडल करता था।
एक दिन की बात हैं जब इंडिया केयर और वर्ल्ड केयर के एच आर ने एक दिन के लिए ट्रिप का प्लान बनाया वो केवल स्टाफ लिए था। वो जो दस वर्कर थे वो भी मुझे आकर पूछने लगे हमें भी ट्रिप पर ले चलो। मैंने बात एच आर और हायर ऑथरिटी को बता दी थी। लेकिन हायर मैनेजमेंट ने इसे इंकार कर दिया।
अब कामराज ने अपना काम शुरू किया। क्यों की उसे मौका मिला था की पत्नी से डिवोर्स लेने का। कम्पनी का काम खत्म होने के बाद सभी दस कामगारों एक करके कम्पनी के बहार बुला लिया। और कहने लगा।
"हम दस सालों से ज्यादा इस कम्पनी में काम किया, फिर कम्पनी ट्रिप पर ले जाने से इंकार किया। "
"कामराज की बात बिलकुल सही हैं, हमें क्या मिला इससे ?" दूसरा कामगार बोला।
"हम अपना यूनियन बनाएंगे।" तीसरा कामगार बोला।
"और जो छुट्टी हैं बोलकर मैनेजर ने बतया हैं, फिर भी हम काम पर आएंगे।" कामराज बोला।
सभी दस कामगार थे वो ऑपरेटर के पोस्टिंग में थे। सभी ने निर्णय लिया की यूनियन बनाने का।
मैं ऑफिस स्टाफ के साथ ट्रिप पर नहीं गया था। दूसरे दिन सुबह मुझे सिक्योरिटी गॉर्ड ने फ़ोन लगाया और कहने लगा वो दस कामगार काम पे आये हुए हैं। मैंने उसे कहा की एच आर को इन्फॉर्म करने को, ठीक हैं सर कहकर फ़ोन काट दिया।
जब वही दस कामगारोने एक बाहरी यूनियन के साथ जुड़कर यूनियन बनाया था। पिछले बार जब १२ कामगारोने मिलकर हेल्थ केयर में सी आई टी यूनियन बनाया था। तभी बड़ी मुश्किल से यूनियन छुड़ाया था। अब की बार वो सी आई टी यु में नहीं बल्कि दूसरे एसोसिशन से जुड़े थे।
जब मैं सोमवार को ऑफिस के लिए गया था तो मुझे वि पि और एच आर ने बुलाया और एसोसिएशन पत्र दिखाया, और कहा वो दस लोगो ने अपना यूनियन बना लिया हैं।
मीटिंग हॉल मेरे साथ एच आर, सी यी वो और भी मुख्य लोग उपस्थित थे। सबसे पहले एच आर ने मुझे पूछा।
"सर अब क्या करना चाहिये?'
मैंने कहा "सभी का सेटलमेंट करवा दो। यह लोग तो वर्ल्ड केयर के नियुक्ति धारक भी नहीं हैं।"
कुछ डिस्कशन के बाद हम लोग सभी को मुवावजा जोड़कर रुपए ४ लाख का हर एक नाम से चेक तयार हो गया।
पांच को दस मिनिट कम थे सभी दस कामगारोंको कॉन्फरन्स रूम में बुला लिया गया। और एच आर कहने लगा। सबसे पहले कामराज को बुलाया गया और चेक देते हुए एह कहा गया की अब हेल्थ केयर कम्पनी बंद हो चुकी हैं। इस लिए आपका सेटलमेंट कर रहे हैं। कामराज ने चेक लिया। इसके साथ साथ सभी कामगारोने अपना अपना चेक लिया और चेक लेते समय यह कह दिया गया की कल से काम को आने की जरुरत नहीं। लेकिन मैनेजमेंट को जब तक चेक अकाउंट में क्लियर नहीं होता तब तक कुछ कह नहीं सकते। आखिर वह दिन आ गया सभी का चेक क्लियर हो चूका था।
कुछ दिन और बीत गए और कंपनी के पास एक कोर्ट केस का नोटिस आया। अमाउंट बैंक में जमा होने के बाद भी वो १० कामगार लेबर कोर्ट में मुकदमा दायर किया था।
कामराज ने फिर वकील से मिला और कहा। "सर अभी तो डिवोर्स हो जायगा ना अब तो जॉब भी नहीं और केस लेबर कोर्ट में चल रहा हैं।"
"हाँ बिलकुल हो जायेगा।" वकील ने हस्ते हुए कहा।
मैं भी कंपनी छोड़ चूका था। एक दिन कामराज मिला और जब मैंने पूछा डिवोर्स हो गया क्या ? हाँ सर हो गया और दूसरी शादी भी हो गयी। कोर्ट केस अभी भी चल रहा था। कामराज दूसरा जॉब करके आराम से जिंदगी बिता रहा था।
यह थे एक कामगार ने डिवोर्स के लिए कम्पनी में यूनियन बनाकर कोर्ट में ले गया।

